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मेंथी के लड्डू से करे कई बीमारियों को दूर।

आयुर्वेद में मेंथी का प्रयोग बहुत ही लाभकारी प्रयोग है। कम उम्र के लोग अगर इसका सेवन करते है तो कहना ही क्या और 40 से अधिक उम्र के लोगो  के लिए तो यह आशीर्वाद है।
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मेथी स्वास्थ्य की दृस्टि से बहुत ही गुणकारी होता है ।मेंथी में काफी मात्रा  में खनिज तत्व पाये जाते है जिससे सैकड़ो रोगों का उपचार किया जा सकता है ।आयुर्वेद में मेंथी का प्रयोग बहुत ही लाभकारी प्रयोग है। कम उम्र के लोग अगर इसका सेवन करते है तो कहना ही क्या और 40 से अधिक उम्र के लोगो  के लिए तो यह आशीर्वाद है। मेंथी की तासीर गर्म होती है इसलिए गर्म प्रकृति के लोगो को इसका प्रयोग सावधानी से करना चाहिए ।आज के इस पोस्ट में हम आपको बताएँगे की मेंथी के लडडू कैसे बनाया जाता है।

सामग्री

  • 500 ग्राम मेंथी दाना ।
  • 50 ग्राम बबूल का गोंद।
  • 250 ग्राम गेंहू का चोकर वाला आटा।
  • 400 ग्राम गुड़ (मधुमेह के रोगी के लिए गुड़ की जगह शहद का प्रयोग करे)
  • 500 ग्राम गाय का दूध।
  • 100 ग्राम सोंठ पिसा हुआ ।
  • 100 ग्राम गाय का शुद्ध घी।
  • 5 ग्राम छोटी इलायची का बीज।
  • 50 ग्राम बादाम पिस्ता

बनाने की विधि

  • सबसे पहले रात्रि में मेंथी दाना को दूध में मिलाकर रख दे सुबह जब यह मेंथी भींगकर फूल जाय (अगर ना फुले तो दूसरे दिन तक भींगने दे )
  • भींगने के बाद इस मेंथी को मिक्सी या सिलपट्टी में पीसकर अलग रख ले और इसे 50 ग्राम घी को कड़ाही में डालकर हल्के आंच पर गुलाबी होने तक भुने और इसे अलग रख दे।
  • अब पुनः 50 ग्राम घी को कड़ाही में गर्म करके इसमें बबूल के गोंद को बड़े की तरह तले फिर तुरंत ही सोंठ और चोकर युक्त गेंहू का आटा डालकर हल्के आंच में भून ले ।
  • अब पहले से भूनकर रखा हुआ मेंथी का पाउडर भी दाल दे और अच्छी तरह मिला ले फिर बारीक़ किया हुआ इलायची के पाउडर और गुड़ को मिला ले ।
  • जब सभी मिश्रण एक सा हो जाय तो कड़ाही को नीचे उतारकर गुनगुने हालत में 10-10 ग्राम के लड्डु बना ले और बरनी में सुरक्षित रख ले ।

 सेवन मात्रा

20 से कम उम्र के लोगो को एक-एक लडडू सुबह और शाम को खाना खाने के बाद खूब चबा -चबा कर खाना चाहिए और ऊपर से गुनगुना दूध पीना चाहिए और अधिक उम्र के लोगो को दो-दो लडडू सुबह शाम खाना खाने के बाद लेना चाहिए और ऊपर से गुनगुना दूध पीना चाहिए।

लाभ

यह वात विकार ,मोटापा , और मधुमेह रोगियो के लिए तो किसी वरदान से कम नहीं है।यह वात नाड़ी को शक्ति प्रदान करता है और वात विकार को दूर करके नवजीवन प्रदान करता है । मोटापा घटाकर पाचन संस्थान को मजबूत बनाता है व कब्ज को दूर करता है।यह बालो और त्वचा के लिए बहुत फायदेमंद है । स्त्रियों में प्रदर रोग , सिर दर्द, शारीरिक दुर्बलता , को दूर कर शरीर को कान्ति युक्त और स्फूर्ति प्रदान करता है। यह खून को शुद्ध और साफ खून में वृद्धि करता है।
नोट : यह लेख या जानकारी केवल सामान्य ज्ञान प्रदान करती है अधिक जानकारी के लिए हमेशा एक योग्य विशेषज्ञ या डॉक्टर की परामर्श ले। khabar4you.com इस जानकारी के लिए जिम्मेदारी का दावा नहीं करता है। 
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